जब आपके अंदर अपना कुछ करने की चाहत हो तो आप जॉब में सबकुछ पाते हुए भी कचोटन महसूस करते हैं: सत्तुज

 

लाख रुपये की पगार हर महीने की 5 तारीख को, एक बड़ी गाड़ी,ढ़ेर सारे बैलेंस,सूट-बूट, टाई-कोट,अमूमन 100 में 80 लोग यही सोचते हैं और इसी को दिमाग में रख कर विषयों का चयन करके पढ़ाई करते हैं, कुछ के सपने पूर्ण रूप से साकार होते हैं और कुछ के आंशिक रूप से,
बाद बांकी बचे लोग अपना उद्यम करने का सोचते हैं- कुछ बहुत सफल होते हैं, कुछ कम सफल होते हैं और कुछ विफल.
सत्तुज़ की कहानी भी कमोबेश ऐसी ही है, सचिन कुमार जो कि सत्तुज़ के फाउंडर मेम्बर हैं, अपनी प्रारम्भिक शिक्षा के बाद MBA करने चले गए एवं फिर एक मल्टी नेशनल में व्हाइट कॉलर जॉब की, फिर न्यूयॉर्क से जॉब के लिए बुलावा आया वह समय शायद तय करने का था कि अपना कुछ करना है या यूं ही जीवन भर ऑफिस-ऑफिस करना है।
फिर एक दिन सचिन जॉब छोड़ कर वापस मधुबनी आये और परिवार के बिजनस में सक्रिय हो गए, फिर भी कुछ अलग करने का कीड़ा दिमाग में शेप ले रहा था। कुछ बचपन के स्कूल दोस्तों से बात की और कुछ अलग करने की बात सोची गयी। नया कुछ करना और ऐसा कुछ करना जिसमें बिजनस और इससे जुड़े लोगों का भविष्य सुरक्षित रहे एवं प्रोडक्ट की मांग भी बाजार में हमेशा रहे। हम ऐसे प्रोडक्ट के साथ बाजार में उतरना चाहते थे जो किसी परिचय की मोहताज न हो,हर कोई उसे जनता हो और झटके से ले ले।

14 अप्रैल 2018 को हमारी सोच ने मूर्त रूप धारण किया और “सत्तुज़” कम्पनी अस्तित्व में आई। हर बिहारी के दिल में सत्तू का एक अलग स्थान है। हर उम्र के लोग अपनी सुविधा के अनुसार सत्तू को अपने लिए बेहतर भोजन बना लेते हैं ; यथा- ये सुपाच्य है, ये डायबिटीज़ में बहुत फायदा करता है, इसका लस्सी बहुत बढ़ियाँ होता है,इसकी खुशबू बहुत अच्छी है,इससे मोटापा कम होता है और भी बहुत कुछ खूबियाँ बता कर लोग इसे ना सिर्फ प्रयोग करते हैं बल्कि विश्वास भी करते हैं। यह एकमात्र ‘मेड इन बिहार ‘ उत्पाद है |

एक अकेले सत्तू के इतने फायदे हैं और सारे फायदे सभी को पता तक नहीं , ये थोड़ा खल रहा था। जो बिहार में हैं उन्हें तो सत्तू मिल जाता है लेकिन जो अन्य प्रदेश में हैं उनको क्या मिलता होगा ? बहुतेरे प्रश्न दिमाग मे घुमड़ रहे थे, उत्तर ढूंढ़ा जा रहा था .लेकीन ऐसी के उत्तर मे ये

तय हो चुका था कि अब सत्तू उन हर जगह तक पहुंचेगी जंहा तक ये नहीं पहुंच पाया है। चूंकि सत्तू को हमने प्रोसेस करके आकर्षक पैकेजिंग की और ब्रॉन्डिंग की, FSSAI से एप्रूव करवाया और इसे हेल्थ ड्रिंक की श्रेणी में रखा ; इसलिए इसका नाम भी थोड़ा अलग रखने की कोशिश की “सत्तुज़”

हमारे स्टार्टअप को अब बाजार में पहचान मिल चुकी थी, लोग हमारे प्रोडक्ट्स में बारे में बोलने और लिखने लगे थे जो कि उत्साहवर्धक था। देश के बड़े बॉण्ड्स ने सत्तुज़ पर विश्वास जताया तथा हमें सहयोग किया जिसमें IIM कोलकत्ता,इंडियन एंजल नेटवर्क, बिहार इंडस्ट्रियल एसोसिएशन मुख्य रूप से मार्गदर्शक रहे हैं।

सत्तुज़ को हर उस ग्राहक ने सराहा जिसने बाहर रहकर सत्तू की आस लगानी छोड़ दी थी। दरअसल बिहार के लोग जागरूक हो गए हैं, अब हमारे देश मे रेट से ज्यादा लोग न्यूट्रिशन वैल्यू को प्राथमिकता देने लगे हैं, सत्तुज़ चूंकि हेल्थ ड्रिंक है और आसानी से घुल भी जाती है। यकीन मानिये कि हमारे लोगों के कॉल्स देश के अलग – अलग शहरों से आने लगे कि इतने सालों बाद सत्तू को टेस्ट किया, गाँव की याद आ गयी, आप लोगो को तहे दिल से धन्यवाद इत्यादि |

आप जैसे लोगो के के प्यार और सहयोग से ही आज हमारी ये एक छोटी सी इकाई अपने बिहार का नाम रौशन करते हुये प्रगति के मार्ग पर चलते जा रहे है और अपने बिहार के अन्य लोगो को भी आत्म – निर्भर बनाने मे सक्षम होंगे |

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